मार्कशीट्स बैकडेट में बीपीएड में दाखिला दिखाकर तैयार की गई थीं.
* बेरोजगारी, करियर या शिक्षा में असफलता को दूर करती हैं।
* ऐसी बीमारियां जिनका इलाज संभव नहीं है, वह भी काली की पूजा से समाप्त हो जाती हैं।
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
बगलामुखी : ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिव्हा कीलय, बुद्धिं विनाश्य ह्लीं ॐ स्वाहा:।
गुप्त नवरात्रि अंतिम दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें।
घट (कलश) स्थापना नवरात्रि पूजा का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यह शुभता, ऊर्जा, और देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक है।
गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन से here संकट, आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होते हैं।
गुप्त नवरात्रि में करें ये साधना, जो चाहोगे वो मिलेगा
गुप्त नवरात्रि पर्व के दिनों में सुबह जल्द उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
घट स्थापना करें: मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोएं।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
कलश में गंगाजल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल, चंदन, और दूर्वा डालें।
यह समय साधक को आत्म-चिंतन और आत्म-साक्षात्कार का अवसर देता है। ध्यान और तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।